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मोहबब्त हमारी - Sp Rediwala

  मोहब्ब़त हमारी निलाम हुई कौड़ियों के भाव से  कभी सोचा ना था कि दर्द भी मिल सकता है लगाव से वो बात अलग है की अब दिखाते नहीं है हम वरना खून तो आज भी टपकता है उसके दिए घाव से एक वक्त था की उसकी गलीयों मै रोज जाते थे हम  एक वक्त है की हम गुजरते भी नहींं है उसके गांव से एक दरिया जो हमसे ना हुआ पार कई सालो मैं  और एक वो की हाथ छोड पार कर गया गैरो की नाव से वो जब तक साथ था हम कदमों में फूल बीछाते रहे वो कमबख़्त एक कांटा ना निकाल सका हमारे पाँव से मुझे मालूम था कि मैं ठोकर खाकर ही संभल लूंगा इसलिए कभी पत्थर हटाया ही नहीं मैंने राहों से - Sp Rediwala

क्यों प्रसिद्ध है सहारनपुर का शाकुम्‍भरी देवी मंदिर -

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शाकुम्‍भरी देवी मंदिर,सहारनपुर का सबसे प्रसिद्ध स्थल जहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु माता शाकुम्‍भरी के दर्शन करने आते हैं यह सहारनपुर से 40 किमी. की दूरी पर स्थित है जो शहर के शाकुम्‍भरी क्षेत्र में आता है। हालांकि, इस मंदिर का कोई ऐतिहासिक और पुरातात्विक उल्‍लेख नहीं है लेकिन सामान्‍य रूप से माना जाता है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है। और यह सहारनपुर का सबसे प्रसिद्ध स्थल है।    इस मंदिर की मूर्तियां काफी प्राचीन नहीं दिखती हैं लेकिन फिर भी कुछ लोगों का मानना है कि इन्‍हे मराठा काल के दौरान स्‍थापित किया गया था जबकि अन्‍य लोगों का मानना है कि आदि शंकराचार्य ने अपनी तपस्‍या को यहीं किया था। इन सभी मतों के अलावा, इस मंदिर में साल भर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और दर्शन करते हैं। इस मंदिर में माता की पूजा की जाती है और माना जाता है कि मां शामुम्‍भरी देवी ने महिषासुर महा दैत्‍य को मारा था और लगभग 100 साल तक तपस्‍या की थी जबकि वह महीने में केवल एक बार अंत में शाकाहारी भोजन ग्रहण किया करती थी। नवरात्रों के समय यहाँ पर काफी भीड़ देखने को मिलती है।  कुछ लोगों का यह कहना भी ...

सहारनपुर में मौजूद है शाहजहां के द्वारा बनवाया गया शिकारगाह -

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(सहारनपुर) : दुनिया को ताजमहल जैसी नायाब इमारत सौंपने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने प्रेम के पंख सहारनपुर में भी फैलाए थे। सन् 1636 में अलीमरदान खां ने शिवालिक तलहटी में बादशाह शाहजहां के लिए शिकार खेलने के लिए बादशाही महल व बेहद खूबसूरत शिकारगाह बनवाई थी। यमुना के पूर्वी किनारे पर बादशाह महल के नाम से विख्यात इस महल में शिकार करने के दौरान शाहजहां इसी इमारत में आकर आराम फरमाते थे। यदि उन्हें दिल्ली जाना होता था तो वह इसी यमुना के पश्चिमी किनारे से होकर चले जाते थे। इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग ने इसके आसपास के दो सौ मीटर क्षेत्र को 'विनियमित' श्रेणी में अधिसूचित कर दिया है, इसके बाद भी अवैध कब्जों के कारण यह इमारत अपन बदहाली पर आंसू बहा रही है। इमारत की 200 मीटर की परिधि में भी निर्माण हुए हैं। यमुना किनारे ऊंचाई पर बनी इस इमारत का निर्माण लाखौरी ईटों से किया गया है। बेहद ऊंचाई पर होने के कारण यह स्थल किसी हवामहल से कम नहीं है। इस समय यहां दो कमरे मौजूद हैं। मुख्य इमारत का बचा अवशेष करीब चार हजार वर्ग गज में फैला है। यहां से पूरी यमुन...

उत्तर प्रदेश राज्य का एक शहर सहारनपुर :-

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सहारनपुर   उत्तर प्रदेश   प्रान्त  का एक  शहर  है। सहारनपुर की स्थापना 1340 ई के आसपास हुई और इसका नाम एक राजा सहारन पीर के नाम पर पड़ा। सहारनपुर की काष्ठ कला और देवबन्द दारूल उलूम विश्वपटल पर सहारनपुर को अलग पहचान दिलाते हैं।  शहर के उद्योगों में  रेलवे  कार्यशालाएं, सूती वस्त्र और चीनी प्रसंस्करण,  काग़ज़ ,गत्ता  निर्माण,सिगरेट उद्योग. , और अन्य उद्यम शामिल हैं। यहाँ दफ़्ती और मोटा काग़ज़, कपड़ा बुनने, चमड़े का सामान बनाने और लकड़ी पर नक़्क़ाशी का काम अधिक किया जाता है। सहारनपुर कृषि उत्पादों का एक सक्रिय केन्द्र भी है। आसपास के क्षेत्र की प्रमुख फ़सलें आम, गन्ना, गेंहू, चावल और कपास हैं। शहर में एक केंद्रीय फल शोध संस्थान, राजकीय वानस्पतिक उद्यान एक विमानचालन प्रशिक्षण केन्द्र और कई कई तकनीकी और प्रबंधन संस्थान और महाविद्यालय स्थित है यहाँ प्रसिद्ध रेलवे स्टेशन है। यहाँ से निकटवर्ती स्थानों हरिद्वार,देहरादून, ऋषिकेश ,विकाश नगर, पोंटासाहिब, चंडीगढ़,अंबाला,कुरुक्षेत्र, दिल्ली, यमुनोत्री को सड़कें गई हैं। 2011 की जनगणना के अनं...